डॉक्टर अब्दुल जलील फरीदी साहब की 47 वीं बरसी पर खिराज ए अकीदत पेश की गयी की गई

बरेली 19 मई ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस के संस्थापक सामाजिक न्याय के पैरोकार डॉक्टर अब्दुल जलील फ़रीदी साहेब मरहूम की 47 वीं बरसी पर मुस्लिम मजलिस की जानिब से महेशपुर सीबीगंज में एक बैठक आयोजित कर डॉक्टर अब्दुल जलील फरीदी साहब को ख़िराजे अकीदत पेश की गई।

इस अवसर पर मुस्लिम मजलिस के राष्ट्रीय महासचिव मुस्तकीम मंसूरी ने डॉक्टर फरीदी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की आजादी के बाद इस मुल्क में दलितों, अल्पसंख्यकों, पिछड़ों,व अति पिछड़ों को डॉक्टर फरीदी सत्ता का असली वारिस मानते थे। इसी को ध्यान में रखते हुए सामाजिक न्याय के पैरोकार डॉक्टर फरीदी ने 3 जून सन उन्नीस सौ 68 को मुस्लिम मजलिस की स्थापना करके उस वक्त की कांग्रेस हुकूमत को हिला दिया था। उस वक्त की प्राइम मिनिस्टर इंदिरा गांधी डॉक्टर फरीदी से भयभीत होकर अपनी केंद्र की सरकार में डॉक्टर फरीदी को कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा देकर उस वक्त के मुसलमानों के कद्दावर नेता सामाजिक न्याय के पैरोकार डॉक्टर फरीदी को कांग्रेस में शामिल करा कर मुस्लिम मजलिस को समाप्त कर वाना चाहती थी। क्योंकि कांग्रेस का जो वोट बैंक दलित, मुस्लिम, पिछड़ा और अति पिछड़ा कांग्रेस के साथ था। और कॉन्ग्रेस उन पर शासन कर रही थी। और डॉक्टर फरीदी कांग्रेस के उसी वोट बैंक को सत्ता का असली वारिस मानकर उनमें सत्ता की भूख पैदा करने का काम कर रहे थे। जिसके कारण इंदिरा गांधी सहित कांग्रेस के कई दिग्गज परेशान थे। 

मुस्तकीम मंसूरी ने कहा डॉक्टर फरीदी को मान्यवर कांशीराम अपना आदर्श मानते थे। क्योंकि डॉ फरीदी ने दक्षिण भारत के दलित महापुरुषों महात्मा ज्योतिबा फुले, परिहार, सावित्रीबाई फुले सहित कई दलित महापुरुषों को उत्तर भारत में लाकर दलितों में उनकी लोकप्रियता बढ़ाने में जहां महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वहीं दक्षिण भारत के दलित महापुरुषों के लिटरेचर को ट्रांसलेट करा कर उत्तर भारत के दलित नेताओं तक पहुंचाया। यही वजह रही जो काशीराम डॉक्टर फरीदी को अपना आइडियल मानते थे। देश में पहली बार सामाजिक न्याय के पैरोकार डॉ फरीदी ने दलित, मुस्लिम, पिछड़ा, और अति पिछड़ा वर्ग में राजनीतिक चेतना के साथ सत्ता की भूख पैदा करके पहली बार 1969 में जनसंघ व सोशलिस्ट पार्टी की हिमायत (समर्थन) करके डॉ फरीदी ने 

  चौधरी चरण सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनवा कर यह संकेत दे दिया था। कि अब इस मुल्क के 85% वर्ग सत्ता पर काबिज होने के लिए तैयार हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर फरीदी साहब ने 1974 में त्रिगुट मोर्चा बनाकर उत्तर प्रदेश में इंदिरा गांधी को सीधी चुनौती देते हुए सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था। जिससे कांग्रेस में हाहाकार मच गया था। तभी राजनीति की माहिर इंदिरा गांधी ने मुस्लिम वोटों के बंटवारे की नियत से 1974 के चुनाव में मुस्लिम लीग को भी मैदान में उतारवा दिया था। मुस्लिम लीग के चुनाव में उतरने से मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो गया। और कांग्रेस अपने मकसद में कामयाब हो गई।  जिसके बाद 19 मई 1974 को डॉक्टर फरीदी साहब का इंतकाल हो गया। और सामाजिक न्याय का बड़ा पैरोकार गठबंधन की राजनीति के जनक देश के 85% सत्ता के वारिसों को सत्ता सौंपने का सपना लेकर इस दुनिया से रुखसत हो गए आज उनकी 47 वीं बरसी पर मुस्लिम मजलिस की ओर से ख़िराजे अकीदत पेश किया गया आज डॉक्टर फरीदी साहब हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनके द्वारा बनाई गई मुस्लिम मजलिस आज भी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली प्रदेश में उनके मिशन पर इस संकल्प के साथ काम कर रही है की वह दिन जल्द आएगा जब इस देश का दलित, अल्पसंख्यक, पिछड़ा, और अति पिछड़ावर्ग संगठित होकर सत्ता प्राप्ति के लिए मुस्लिम मजलिस का परचम उठाएगा और डॉक्टर अब्दुल जलील फरीदी के सपनों के 

भारत का निर्माण होगा।

आज की बैठक में सैयद कामरान अली, अख्तर रजा, अकरम मियां, नाजिश अली, रफी मंसूरी, शहंशाह आलम, शाहिद खान, हनीफ अल्वी, जुनेद अंसारी, अतीक अंसारी, सलीम मंसूरी, फरहान अख्तर, डॉक्टर मुशाहिद अली, जुनेद हसन खान एडवोकेट आदि उपस्थित रहे।



 

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