भारत के पांचवे प्रधानमंत्री किसान मसीहा स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के 29 मई 1987 मैं स्वर्गवास


 भारत के पांचवे  प्रधानमंत्री किसान मसीहा स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के 29 मई 1987 मैं स्वर्गवास


 34 वी पुण्यतिथि पर जीवन परिचय चरण सिंह जी का जाट परिवार में जन्म 23 सितंबर 1902 में हुआ अर्धांगिनी गायत्री देवी 15 दिसंबर 1905  जन्म 10 मई 2002 निधन 

स्थान बाबूगढ़ छावनी के पास नूरपुर गांव अब जिला हापुड़ में लगता है छप्पर वाली मड़ैया कहा जाता है चौधरी चरण सिंह जी की माता नेत्रकौर और पिता चौधरी मीर सिंह जी ने अपने नैतिक मूल्यों को विरासत में सौंपा चौधरी चरण सिंह के जन्म के 6 वर्ष बाद चौधरी मीर सिंह जी परिवार सहित नूरपुर से जानी खुर्द के पास भूपगढ़ी जाकर बस गए यहीं से चौधरी चरण सिंह जी ने गरीब व किसान के शोषण के खिलाफ संघर्ष का बीड़ा उठाया आगरा विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा प्राप्त कर 1928 में गाजियाबाद मैं वकालत प्रारंभ की

कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन 1929 में पूर्ण स्वराज उद्घोष से प्रभावित होकर युवा चरण सिंह जी ने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया 1930 में महात्मा गांधी जी द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत नमक का कानून तोड़ने का आह्वान किया गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिंडन नदी पर नमक बनाकर लोगों को वचनबद्ध किया चरण सिंह जी को छह माह की सजा हुई जेल वापसी के बाद महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में पूरी तरह से स्वतंत्रता संग्राम में समर्पित कर दिया

1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह से गिरफ्तार हुए अक्टूबर 1941 में मुक्त हुए सारे देश में अंग्रेजों के खिलाफ आक्रोश था अंग्रेजों भारत छोड़ो की आवाज पूरे देश में गूंजने लगी 9 अगस्त 1942 को अगस्त क्रांति में चरण सिंह भूमिगत होकर आसपास के जिलों और गांव में गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किया मेरठ प्रशासन ने चरण सिंह को देखते ही गोली मारने का आदेश दे रखा था पुलिस चरण सिंह जी की तलाश में भागती रही युवा चरण सिंह जी सभाएं करके निकल जाते थे एक दिन गिरफ्तार कर लिए गए राज बंदी के रूप में डेढ़ साल की सजा हुई जेल में ही लिखी पुस्तक शिष्टाचार भारतीय संस्कृति समाज के शिष्टाचार के नियमों का एक बहुमूल्य दस्तावेज बनाया 


1 जुलाई 1952 को यूपी में उनके सहयोग से जमीदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ गरीबों को अधिकार मिला लेखपाल के पद का सृजन हुआ 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून पारित किया गया 3 अप्रैल 1967 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने 17 अप्रैल 1968 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया मध्यावधि चुनाव में अच्छी सफलता मिली दोबारा 17 फरवरी 1970 को मुख्यमंत्री बने


 उसके बाद केंद्र में गृह मंत्री बने मंडल और अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की 1979 में वित्त मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक की स्थापना की 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक चौधरी चरण सिंह जी समाजवादी पार्टियों व कांग्रेश यू के सहयोग से प्रधानमंत्री बने


 1974 में चौधरी चरण सिंह जी ने भारतीय लोक दल नाम से पार्टी बनाई उसका चुनाव चिन्ह हलधर किसान था चौधरी चरण सिंह जी के स्वर्गवास के बाद  समाजवादी जनता दल जिसमें  मुलायम सिंह यादव  जी लालू प्रसाद यादव जी नीतीश कुमार जी शरद यादव जी  अभय चौटाला जी बीजू पटनायक जी आदि ने अलग पार्टियां बना ली आपसी फूट व चुनाव आयोग के दखल  के बाद 7 बार के सांसद केंद्रीय मंत्री रहे जिनका जन्म  12 फरवरी 1939 लंबी बीमारी के बाद 6 मई 2021 गुरुग्राम मैं निधन हो गया स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह जी ने राष्ट्रीय लोक दल के नाम से अलग पार्टी बनाई जिसका चुनाव चिन्ह नल है 


चौधरी अजीत सिंह जी के स्वर्गवास बाद बेटे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी जी को सर्व सहमति से स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह जी के उत्तरा अधिकारी चुने गए 25 मई 2021 से आरएलडी पार्टी की कमान माo जयंत चौधरी जी के हाथ में आ गई

किसान मसीहा स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी की 34 वी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन

चौधरी शौकत अली चेची

    प्रदेश अध्यक्ष 

भाकियू ( बलराज)

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