पूर्व विधायक की बरेली की राजनीति में साफ-सुथरी छवि की भरपाई नहीं हो पाएगी। बसपा के मजबूत स्तंभ थे, पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह।

 पूर्व विधायक की बरेली की राजनीति में साफ-सुथरी छवि की भरपाई नहीं हो पाएगी। बसपा के मजबूत स्तंभ थे, पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह।





बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए बरेली से मुस्तकीम मंसूरी की खास रिपोर्ट।


जिंदगी में कभी हार ना मानने वाले पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह लाइलाज बीमारी से हार गए।


एसपी देहात बरेली का 24 घंटे में ट्रांसफर करवा कर अपने कद का एहसास कराया था, वीरेंद्र सिंह ने


बरेली 30 मार्च बसपा के कद्दावर नेता कैंट विधानसभा और बिथरी चैनपुर विधानसभा से दो बार के विधायक बरेली जनपद में बसपा की राजनीति के मजबूत स्तंभ वीरेंद्र सिंह का आज दोपहर 12: 15 बजे निधन हो गया पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह के निधन की खबर सुनकर बहुजन समाज पार्टी के नेता जहां सन्नाटे में आ गए वही विपक्षी पार्टियों के नेता भी विरेंद्र सिंह के निधन की खबर से यह कहते दिखे कि आज बरेली ने एक साफ-सुथरी छवि सर्वप्रिय जनप्रिय नेता को खो दिया। पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह अपने मधुर व्यवहार से लोगों के बीच पहचाने जाते थे। पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह के राजनीतिक सफर का आगाज वर्ष 1995 उनके पैतृक गांव भगवानपुर से उनके निर्विरोध बीडीसी चुने जाने से शुरू हुआ वर्ष 1996 बिथरी ब्लाक प्रमुख चुने गए। सन 2000 में उनके भाई देवेंद्र सिंह जिला पंचायत सदस्य और बीडीसी चुने गए बाद में बीडीसी पद से इस्तीफा दिया। सन 2002 में वीरेंद्र सिंह ने ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल जिसे बरेली में कोई पहचानता तक नहीं था। से कैंट विधानसभा से मजबूती के साथ चुनाव लड़े और अच्छे वोट भी लिए। इसके बाद अगला चुनाव बीएसपी के टिकट पर कैंट विधानसभा से दमदार तरीके से लड़े और पूर्व मंत्री प्रवीण सिंह ऐरन को हराकर पहली बार विधायक चुने गए और उत्तर प्रदेश में बसपा सुप्रीमो बहन कुमारी मायावती के नेतृत्व में सरकार बनी। बसपा की सरकार बनने के साथ ही विधायक वीरेंद्र सिंह का शुमार जिले के कद्दावर विधायकों में होने लगा। अपने मधुर व्यवहार साफ-सुथरी छवि और सीधे जनता से संपर्क साधने में माहिर विधायक वीरेंद्र सिंह की पहचान बरेली मंडल के मजबूत विधायकों में होने लगी। यह विधायक वीरेंद्र सिंह का व्यवहार ही था। कि छोटे से छोटा कार्यकर्ता अपनी बात विधायक के सामने रख लेता था। और सब की बात को वह ध्यान से सुनते और बड़े से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं को को पूरा सम्मान देना। विधायक वीरेंद्र सिंह के कुशल नेतृत्व को दर्शाता था। यही कारण था। की बसपा सरकार में एसपी देहात जो सत्ता पक्ष या विपक्ष के कार्यकर्ता तो अलग विधायकों और सांसदों को भी तवज्जो नहीं देते थे। इसकी जानकारी जब विधायक वीरेंद्र सिंह को हुई तो उन्होंने एसपी देहात को फोन किया। मगर एसपी देहात का रवैया बसपा विधायक वीरेंद्र सिंह को पसंद नहीं आया। और विधायक वीरेंद्र सिंह ने एसपी देहात का फोन काट कर तत्काल लखनऊ फोन कर एसपी देहात को हटाने की सिफारिश मुख्यमंत्री से की और 24 घंटे के अंदर एसपी देहात का तबादला करा कर अपनी हनक का एहसास एसपी सिटी को करा दिया। उसके बाद तो मायावती के शासनकाल में बरेली ही क्या बरेली मंडल के अधिकारी विधायक वीरेंद्र सिंह की कार्यशैली को समझ गए। और बसपा कार्यकर्ता ही क्या आमजन को भी बसपा के शासनकाल में न्याय मिलने मैं कोई देरी नहीं होती थी। वर्ष 2012 में वीरेंद्र सिंह अपने मधुर व्यवहार और साफ-सुथरी छवि के बल पर बिथरी विधानसभा से दोबारा चुनाव जीते और बिथरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2017 के चुनाव में बिथरी विधानसभा क्षेत्र से मोदी लहर में चुनाव तो हार गए। परंतु जनता में उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। परंतु उनके जीवन में तूफान उस वक्त आया जब   उनको लाइलाज बीमारी हो गई। परंतु उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है। कि उनके क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे जिले की जनता रात दिन उनके लिए दुआएं करती थी। जिंदगी में हमेशा विजय पथ पर चलने वाले पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह जिंदगी की जंग हार गए। और अपने हजारों लाखों चाहने वालों को अकेला छोड़ कर इस दुनिया को अलविदा कह गए बरेली की सियासत में विरेंद्र सिंह हमेशा याद किए जाएंगे उनकी कमी हमेशा लोगों को खलेगी आज बरेली में उनके देहांत की खबर सुनकर शोक की लहर दौड़ गई। बसपा ने अपना एक मजबूत स्तंभ खो दिया जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।

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