उर्दू के मशहूर लेखक प्रो अली अहमद फातमी के मकान को जमींदोज करने की घटना की निन्दा


  उर्दू के मशहूर लेखक प्रो अली अहमद फातमी के मकान को जमींदोज करने की घटना की निन्दा

● लखनऊ, 9 मार्च। लेखकों व संस्कृति कर्मियों तथा उनके संगठनों ने उर्दू के मशहूर लेखक व आलोचक और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डा.अली अहमद फातमी का लूकरगंज स्थित मकान को जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरण द्वारा ज़मींदोज़ किये जाने की घटना पर गहरा रोष प्रकट किया है तथा इसे ज्यादती भरी कार्यवाही कहा है।
● आज प्रलेस, इप्टा, जलेस, जसम और समानांतर की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि न सिर्फ प्रो फातमी बल्कि पास में स्थित उनकी बेटी और करीब 6 व 7 निवासियों के घर भी प्रशासन ने गिराये हैं। फातमी साहब, उनकी बेटी व अन्य सभी परिवार अब सड़क पर हैं। सभी का घर गिराने के लिए सिर्फ एक दिन पहले नोटिस मिली और बिना मौका दिए मकान ध्वस्तीकरण की निर्मम कार्रवाई कर दी गयी।
● गौरतलब है कि हरदिल अज़ीज़ फातमी साहब पूरे देश में अपने साहित्यिक अवदान के लिए जाने जाते हैं। उर्दू आलोचना में उनकी पुस्तकों का विशेष महत्व है। इलाहाबाद को हिंदी-उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा के लिए जाना जाता है।

● मौजूदा समय में फातमी साहब एक अहम शख्सियत के रूप में हमारे सामने हैं, जिन पर इलाहाबाद की जनता भरोसा करती और उन्हें अपना लेखक मानती है। हमें फातमी साहब पर गर्व है।

यह भी गौरतलब है कि वे अब बुजुर्ग भी हो चले हैं और उनकी पत्नी काफी बीमार रहती हैं। ऐसे हालात में वे और उनकी बेटी इस वक्त सड़क पर आ गये हैं। शासन-व्यवस्था की इस संवेदनहीन कार्यशैली से समूचा साहित्य-जगत हतप्रभ है।
● बयान में कहा गया है कि इस दौर में लेखकों,संस्कृतिकर्मियों, महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती का दौर चल रहा है।लगता है जानबूझकर इन्हीं कारणों से फातमी साहब को भी इस हुकूमत ने निशाने पर लिया है। बहरहाल, सरकार की इस कारगुजारी की जितनी भी निन्दा की जाय कम है। लेखक, बुद्धिजीवी व संस्कृतिकर्मी व उनके संगठनों की सरकार मांग है कि प्रो.अली अहमद फातमी, उनकी बेटी तथा अन्य सभी प्रभावित परिवारों को मुआवजा देते हुए उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाय, वरना हम सभी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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