क़ुरआन की 26 आयतें हटाए जाने से संबंधित मामले पर क्या है। राजनीतिक दलों का रवैया आखिर क्यों नहीं बोलना चाहते है। राजनीतिक दलों के नेता।

नाजिश अंसारी की रिपोर्ट 




 क़ुरआन की 26 आयतें हटाए जाने से संबंधित मामले पर क्या है। राजनीतिक दलों का रवैया आखिर क्यों नहीं बोलना चाहते है। राजनीतिक दलों के नेता।


बेताब समाचार एक्सप्रेस के लिए बरेली से नाजिश अली की रिपोर्ट


आखिर क्यों वसीम रिजवी पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं। राजनीतिक दलों के नेता


बरेली 19 मार्च, वसीम रिजवी द्वारा क़ुरआन ए पाक से 26 आयतें हटाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल किए जाने को लेकर देश भर के मुसलमानों में वसीम रिजवी के प्रति लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस आक्रोश का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है। कि मुस्लिम समाज के लोग लगातार धरने प्रदर्शन के अलावा वसीम रिजवी को कानूनी नोटिस और उसके खिलाफ मुकदमे करा रहे हैं। आज इस संबंध में बेताब समाचार एक्सप्रेस के संवाददाता ने वसीम रिजवी द्वारा दायर याचिका पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से संपर्क किया। जिसमे सबसे पहले बीएसपी के पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी शमसुद्दीन राईन जो बरेली में मौजूद थे। उनसे उनकी पार्टी बसपा और स्वयं उनका नजरिया जानना चाहा तब शमशुद्दीन राईन ने बड़ी बेबाकी के साथ अपनी बात रखते हुए कहा की क़ुरआन ए पाक तो क्या किसी भी धर्म ग्रंथ में संशोधन का अधिकार भारतीय संविधान के अनुसार किसी भी अदालत को नहीं है। उन्होंने कहा जिस तरह 1988 में पश्चिमी बंगाल हाईकोर्ट में इसी तरह की रिट दायर की गई थी। उसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत खारिश किया गया था। ठीक उसी तरह वसीम रिजवी की याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट में खारिज किया जाएगा। श्री राईन ने कहा हमारी पार्टी और हमारी नेता बहन कुमारी मायावती सभी धर्मों का और उनके धर्म ग्रंथों का सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा वसीम रिजवी के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा कायम कर उसे जेल भेजा जाना चाहिए तभी मुस्लिम समाज का आक्रोश समाप्त होगा। और भविष्य में कोई किसी भी धर्म ग्रंथ के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करने का साहस नहीं कर सकेगा। उसके बाद हमारे संवाददाता ने कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अशफाक सक़लैनी से उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए फोन पर संपर्क किया तब उन्होंने नोएडा होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद हमारे संवाददाता ने कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष अजय शुक्ला से फोन पर संपर्क किया तब अजय शुक्ला ने बताया कि वह रात गाजियाबाद चले गए हैं। जब विश्वस्त सूत्रों से अजय शुक्ला की जानकारी ली गई तब पता चला अजय शुक्ला बरेली में ही मौजूद हैं। वास्तविकता यह है। जिस वक्त हमारे संवाददाता ने उनको फोन किया उस वक्त वह इज्जत नगर क्षेत्र के कृष्णा नगर में मौजूद थे।

यहां यह बताना जरूरी है। के कांग्रेस भी मुसलमानों का वोट तो चाहती है। परंतु उसके स्थानीय नेता मुसलमानों के मसले पर कुछ भी बोलने से बचते हैं। वह इसलिए कि मुसलमानों के मसले पर बोलने से उनका हिंदू वोट नाराज ना हो जाए। यह मुसलमानों के लिए अत्यंत चिंता का विषय है। और मुसलमानों को इस पर गौर करना पड़ेगा कि उनका वोट लेने की चाहत सभी राजनीतिक दल रखते हैं। परंतु उनके धार्मिक ग्रंथ पर टिप्पणी करने वाले के विरुद्ध एक शब्द भी बोलने से डरते हैं। आखिर क्यों?

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