सफाई कर्मचारियों को अगर न्याय चाहिए तो उन्हें अपनी लडाई नगर निगमों से बाहर निकलकर रोड पर लडनी होगी तब ही न्याय सम्भव है ।


 *नींद से जागो कौम के लोगों*

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 सफाई कर्मचारियों को अगर न्याय चाहिए तो उन्हें अपनी लडाई नगर निगमों से बाहर निकलकर रोड पर  लडनी होगी तब ही न्याय सम्भव है । अगर सफाईकर्मी यह सोचते है नगर निगमों मै बैठे सफाईकर्मचारी संगठन उनके लिए कुछ कर सकते है तो भूल जाओ ऐसा होने वाला नही ,क्योंकि आज के समय मे नगर निगमों मे  हजारों  संगठन है वह कर क्या रहे  तो सवाल भी एक है और जबाब भी एक ही हैं,  वह सफाई सैनिकों को गुमराह कर रहै है और कमाई भी  इसे आप सब जानते है यह सच्चाई है इसे छुपाया नही जा सकता है आप सब जानते हो की बेईमान कौन और ईमानदार कौन  ।अगर ऐसा नहीं होता तो हमारे सफाई आयोग के अध्यक्ष और सदस्य और सफाईसैनिकों के  वह बडे नेता कहां थे . जब सफाई कर्मचारियों पर निजीकरण सरकार ने जबर्दस्ती  थोप दिया और यह  सब गूगें बहरों की तरह  देखते रहै और यह सब  छुपाने के लिये सरकार ने  सफाईसैनिकों को स्वछता अभियान का झुंझूना पकड़ा दिया। जबकि यह सब जानते कि सफाईकर्मचारियो की संख्या कम है और काम ज्यादा फिर भी सफाई कर्मचारी संगठनों के वे नेता चुप रहते है  और यह कुछ नहीं बोलेते आखिर क्यों?

 आज कोरोना संकट मे भी सफाई सैनिकों चार ,चार, पाँच पाँच महीनों तक तनख्वाह नहीं दी जाती है क्यों ?बल्कि उल्टा निजीकरण मे ही सफाईकर्मचारियो को  लगाने के लिए हमारे नेता  दलाली करते  है  ।और एक सवाल आज उन सब से करने का समय और इसका जबाब  उन सफाईकर्मचारियो के संगठनों और आयोग अध्यक्ष और सदस्यों से सभी सफाईकर्मचारियो को पूछना चाहिए कि सभी एक बात ईमानदारी से बताओ  कि  आज तक सिर पर मैला ढौना आखिर क्यों बन्द नहीं हुआ ? और कब बन्द होगा ?

सफाईकर्मचारियो का बैकलॉग कोटा कौन खा रहा या फिर  कहां गया  ?आज तक सफाईकर्मचारियो को सैफ्टी उपकरण क्यों नहीं मिले, जिनके ना होने से समाज के  हर रोज सीवरों मे सफाई सैनिक शहीद हो रही हैं आखिर क्यों नहीं मिलते सफाई सैनिकों को  सैफ्टी उपकरण   ? क्यों सफाईकर्मचारियो के नेता और आयोग के अध्यक्ष, सदस्य ,हमारे समाज के जनप्रतिनिधि मालदार और समाज के सफाई सैनिक कंगाल होते जा रहे  है ।

 आज कोरोना  संकट के समय मे भी  भूखमरी की कगार पर  क्यों खडे है ?चन्दा तो देगें सफाई कर्मचारी और मजे मारे नेता ,ऐसे कब तक  सफाई कर्मचारियों को गुमराह 

किया जायेगा ।

आज अगर हमारे सफाईकर्मचारी आठ से दस हजार मे निजीकरण मे काम कर रहे तो इस का दोषी कौन है इस सवाल का जबाब जानो भाईयों कि दोषी कौन ?आज और अभी भी की समस्या है कि  सफाईकर्मचारियो को सन्डे की सरकारी  छुट्टी होने के बाद इन्हें वीआईपी डयूटी  का डर दिखाकर क्यों बुलाया जाता हैं क्यों कोई भी संगठन या सफाईकर्मचारियो का नेता इसका  विरोध नहीं करता ।

आज आधे से ज्यादा  संगठन और नेता सरकार के साथ मिलकर सफाईकर्मचारियो की गुमराह कर रहे हैं और यह सफाई कर्मचारियों को  अपने हक और अधिकारों की बात भी नहीं करने देते ।अरे सफाई सैनिकों  कब तक डरोगे इन मक्कारों से कभी न कभी तो  सवाल भी कर लिया करो ,या फिर ऐसे ही रोते रहोंगे क्योंकि जो तुम्हें बिमार करने वाले है अगर इन्हीं से  बढिय़ा दवाई की उम्मीद करोगे तो सफाई सैनिकों  तुम कभी ठीक नहीं हो सकते अब तुम्हें नया हकीम और दवाखाना ढूंढना पडेग़ा  या बनाना पडेगा ।।

विशेष ः अगर हम ऐसे ही गलत चीजों को अनदेखा करते रहेंगे तो हमारी समस्या का समाधान नहीं होने वाला इसलिए जो आपकी नजर मे  सही है उसका साथ दो और समर्थन करो और जो आपकी नजर मे गलत है उसका  विरोध करो क्योंकि आपकी समझदारी ही आज और कल को बेहतर बना सकती हैं  ।

सभी साथियों को जय भीम 



राम अवतार सिंह वाल्मीकि

प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश

भारतीय स्वाभिमान जन महासभा रजि.

मो 9897393603

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