अब कानूनन जमाखोरी, कालाबाजारी और महंगाई की वजह से देशवासी होंगे बर्बाद♦*

 *🌷तीन ख़तरनाक कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ 8 दिसंबर को भारत बंद करना देशहित में ज़रूरी🌷*

*♦अब कानूनन जमाखोरी, कालाबाजारी और महंगाई की वजह से देशवासी होंगे बर्बाद♦*

*🚩आरएसएस से जुड़े डाकू गुजराती, मारवाड़ी व्यापारियों की वजह से ही हर 37 मिनट बाद*

*🔥आत्महत्या🔥कर रहा है एक "हिन्दू और सिख किसान"🚩*


"आरएसएस-बीजेपी" की नरेंद्र मोदी सरकार ने ज्यादातर सरकारी कंपनियों को बेच डाला है। अब वोह भारतीय किसानों को लूटने के लिए तीन कृषि कानूनों को कोविड-19 के समय संसद को गुंडागर्दी के जरिए बंधक बनाकर पास करवाया है। जिसकी वजह से अंग्रेजों की रखैलों की औलादें चोर और डाकू बने गुजराती, मारवाड़ी और जैनी व्यापारियों को अब जमाखोरी, कालाबाजारी और महंगाई बढ़ाने की कानूनन छुट दी गई है। जिसके तहत पहले कृषि मंडियों को खत्म करके उसकी जगह पर व्यापारियों को औने पौने दामों में किसानों का अनाज लूटने के लिए कानून बनाया गया है। इस लूट के बाद उनको कोर्ट में भी जाने तक की इजाजत नहीं दी गई है। एसे हिटलरशाही कानून इस देश में लाने का काम आरएसएस-बीजेपी के गद्दार व खूंखार ब्राह्मणों और अदानी अंबानी जैसे गुजराती मारवाड़ी व्यापारियों ने मिलकर किया है। जिसकी वजह से पूरे भारत का किसान अपने भविष्य को खत्म होता देख रहा है। वोह समझ गया है कि अब उसे उद्योगपतियों का लेबर बनाकर उनका गुलाम बनाया जा रहा है जैसे अंग्रेजों ने किया था।


इसीलिए तीनों कानूनों के खिलाफ सबसे पहले दिल्ली के करीब बसने वाले पंजाब और हरियाणा के सिख और जाट किसानों ने आंदोलन शुरू किया फिर दिल्ली जाकर उसे चारों तरफ से घेर लिया है। जो सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम है। इसके लिए उनकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। करीब 8 दिन से किसान दिल्ली के रास्तों पर बैठे हुए हैं, लेकिन लुटेरे गुजरातियों की सरकारे उनसे बात करके सिर्फ टाइम पास कर रही है। वोह नहीं चाहती कि बिल वापस लिए जाएं। क्योंकि कानून बनने के पहले से ही अडानी और अंबानी ने सैकड़ों एकड़ जमीनो पर बड़े-बड़े गोडाउन बन गए है। उनको लूट का माल रखने के लिए ही यह तीनों खतरनाक कृषि कानून उनके नौकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बनवाए हैं।


केंद्र सरकार और पंजाब और हरियाणा के सीख व जाट किसानों के बीच 3 से 4 मर्तबा बात हो चुकी है। हर बार केंद्र सरकार ने किसान नेताओं को गुमराह करके टाइमपास करने का ही काम किया है। इसीलिए किसानों ने 8 दिसंबर 2020 को भारत बंद का ऐलान किया है। जो सही कदम है।


इन कानूनों का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं पड़ेगा। बल्कि आम लोगों पर भी पड़ने वाला है। क्योंकि जब व्यापारी किसानों से अनाज लेकर अपना भंडारण करेगा, तो वोह कालाबाजारी करके उसे कई गुना महंगी कीमत पर लोगों को बेचेगा। खुली लूट मचाएगा। इसलिए सभी भारतीय को इस आंदोलन को सफल बनाना ही होगा।


*आरएसएस-भाजपा के लोग और गोदी मीडिया कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू किया गये सिख और जाट किसानों के देशहित आंदोलन को आईएसआई और खालिस्तानीयों का षड्यंत्र बता बता कर लोगों को गुमराह कर रहे है, लेकिन इस झूठ का कोई असर नहीं हो रहा है*


इस लूट को करने के पहले आरएसएस-बीजेपी ने साजिशें करके यूपी और राजस्थान के किसानों में सांप्रदायिकता की आग भड़काकर उन्हें तोड़ने का काम किया है। इसीलिए यूपी और राजस्थान में किसान संगठने अब पहले की तरह काम नहीं कर रही हैं। यूपी में एक मजबूत किसान संगठन था जिसके *नेता "महेंद्र सिंह टिकैत" थे। उनके आंदोलन के समय मंच से एक तरफ नारा उठता था, *हर हर महादेव, तो दूसरी तरफ से जवाब आता था "अल्लाह" हो अकबर, उस एकता से सभी सरकारें डरती थी*


*🚩लेकिन उस आंदोलन को खत्म करने के लिए ही भाजपा-आरएसएस ने उनका इस्तेमाल मुजफ्फरनगर दंगों के समय मुसलमानों के खिलाफ कत्लो-गारत, लूटपाट, शहर-बदर और आगजनी करने के लिए ही किया था। 2013 में जब गुजरात के राजनीतिक गुंडे अमित शाह को गुजरात से तड़ीपार किया गया, तब भाजपा ने उसे यूपी का इंचार्ज बनाया था, तभी सबने कह दिया था कि अब ये जैनी व्यापारी अमित शाह उत्तर प्रदेश में भी हिंदू मुस्लिम दंगा करवाएगा। जिस तरह से इसने गुजरात में करवाया था, जिसमें दोनों समुदाय के लोग मारे जाएंगे*


*🚩अमित शाह ने दक्षिण भारत में 2009 से शुरू "लव जिहाद" जैसे झूठ को हथियार बनाकर उसका झूठा प्रचार किया, मुजफ्फरनगर के जाट बहुल इलाके जहां जाट पंचायतें इंटर कास्ट मैरिज में भी ऑनर किलिंग का समर्थन करती है, उन इलाकों में इंटर रिलिजन दंगे करवाए गए। तब तक महेंद्र सिंह टिकैत जैसे सूफी-संतों को मानने वाले किसान नेताओं की मौत हो चुकी थी* और किसान आंदोलन के नेता अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना चाहते थे जिसका भरपूर इस्तेमाल भाजपा ने किया।


*🚩भाजपा-आरएसएस के बहकावे और समर्थन से जाट किसानों ने मुसलमानों के खिलाफ पंचायतें करके, दंगे करवाएं। जिससे किसान यूनियन के दो फाड़ हो गए। "लाल मोहम्मद जौला" और "राकेश टिकैत" दोनों अलग-अलग यूनियनों के नेता बने। आज यूपी का किसान भाजपा-आरएसएस की उसी लगाई गई सांप्रदायिकता की आग में जलकर लिथड़ रहा है, जिसकी वजह से यूपी में भाजपा का योगी आदित्यनाथ राजपूत और व्यापारियों का दल्ला और गुलाम नरेंद्र मोदी चुनाव जीत रहा है*


मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हिंदू मुस्लिम किसानो की ताकत बंट चुकी थी। इसीलिए किसानों को बर्बाद करने के लिए गुजराती नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने तीन किसान विरोधी कानून बनाए हैं। इसीलिए आज जब किसानों के खिलाफ इतने भयानक कानून पारित किए गए, तो यूपी का किसान लड़ने की ताकत ही खो बैठा है। इन्हें अब समझ में आना चाहिए कि, *भाजपा-आरएसएस ने हिंदुओं का भला करने के लिए नहीं* बल्कि संतो को मानने वाले बहुसंख्यक हिंदू किसानो को लूटकर अंग्रेजों की रखेलों की औलादें गुजराती और मारवाड़ी अदानी और अंबानी जैसे पूंजीपतियों की तिजोरी भरने का ज़रिया बनाने के लिए ही सांप्रदायिकता के जाल में फंसाया है।


*🚩यही हालत राजस्थान की भी है जहां का किसान सांप्रदायिकता का मजा ले रहा है। जिसकी वजह से वोह अपनी असल समस्या ना तो समझ पा रहा है और ना ही संगठित होकर पूंजीपतियों के खिलाफ लड़ रहा है।*


*🚩हिंदू मुसलमान का झगड़ा भाजपा इसीलिए करवाती और फैलाती है ताकि भारतीय समाज टूट जाए और आरएसएस के चाहिते पूंजीवादीयों से लड़ने की वो ताकत खो दे*


*♦यही हालत मजदूर आंदोलन का है। मोदी सरकार गुजराती, मारवाड़ी, जैनी कारपोरेट घरानों के लिए ही हिंदू बहुल मजदूरों के सारे अधिकार छीनती जा रही है। आरएसएस के जरिए मजदूरों के बीच सांप्रदायिकता का जाल फैलाया जा चुका है, जिसकी वजह से उनकी यूनियनें भी बिखर चुकी हैं, संगठनें खत्म हो चुकी है। उनमें लड़ने की ताकत अब नहीं बची है। क्योंकि जुल्म के खिलाफ लड़ने वाले मुस्लिम समाज के मजदूरों को तो संगठित क्षेत्रो से पहले ही बाहर कर दिया गया है*।


*🌴भाजपा-आरएसएस की इस ख़तरनाक चालाकी को समझना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है, और इसके खिलाफ रणनीति बनाकर लड़ना भी मुश्किल नहीं बल्कि आसान है*


*🌹इसके लिए "सूफी और संतों" की पंचशील की विचारधारा पर चलिए, जैसे आज "संतो" को मानने वाला पंजाब का सिख किसान जुल्म के खिलाफ आंदोलन की राह चल रहा है। रास्तों पर बैठकर आंदोलन करने का रास्ता दिखा रहा है। सर्दियों में ठिठुरते हुए भी रास्तों पर सोकर अपने हक के लिए लड़ रहा है। इसी तरह सभी "संतो" को मानने वाले बहुसंख्यक हिन्दू और सूफियों को मानने वाले बहुसंख्यक मुसलमान इस आंदोलन में सामने आकर जुल्म के खिलाफ लड़े तो ही देश बचेगा, देशवासी बचेंगे। वरना अंग्रेजों की रखेलों की औलादे गुजराती मारवाड़ी व्यापारी और नेता यह पूरे देश को बर्बाद करके, देशवासियों को गरीबी के दलदल में फंसाकर अपना गुलाम बना चुके होगे।*


*⚔️सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाजुएं क़ातिल में है🤺*


*🌷तौफिक पटेल 🌷*,

राष्ट्रीय प्रवक्ता व उपाध्यक्ष,

*🌷माइनॉरिटीज़ डेमोक्रेटिक पार्टी🤺*

*🔥"एमडपी"/"MDP"🤺* नागपुर।

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