Auto Expo की रौनक चीन के ऊपर टिकी

देश की सबसे बड़ी वाहन प्रदर्शनी के आयोजकों की आस इस साल ऑटो एक्सपो में रौनक के लिए चीन की वाहन कंपनियों पर टिकी है। ऐसा इसलिए क्योंकि दिग्गज भारतीय और वैश्विक वाहन विनिर्माताओं ने दुनिया के चौथे सबसे बड़े वाहन बाजार में नरमी के कारण एक्सपो में भाग नहीं लेने का निर्णय किया है। चीन के तीन प्रमुख वाहन विनिर्माता इस साल 5 से 12 फरवरी को होने वाले ऑटो एक्सपो में अपने वाहनों को प्रदर्शित करेंगे। इनमें एमजी मोटर ब्रांड की मालिक साइक मोटर कॉर्पोरेशन लिमिटेड, ग्रेट वॉल मोटर्स और चंगन ऑटोमोबाइल शामिल हैं। 

 

वाहन विनिर्माताओं के संगठन सायम के अध्यक्ष राजन वढेरा ने कहा, 'चीन के तीन वाहन विनिर्माताओं ने इस साल एक्सपो में भाग लेने की पुष्टि की है।' हफ्ते भर चलने वाले ऑटो एक्सपो का आयोजन सायम ही करता है। उद्योग के कार्याधिकारियों का कहना है कि चीनी कंपनियां अपने घरेलू बाजार में बिक्री में नरमी का सामना कर रही हैं और भारत को अवसर के रूप में देख रही हैं। हालांकि भारत में कारों की बिक्री में नरमी का रुख बना हुआ है लेकिन 2 एलएमसी ऑटोमोटिव कंसल्टेंसी के अनुसार भारत 2026 तक चीन और अमेरिका के बाद तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन सकता है।

 

वैश्विक दिग्गजों बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, ऑडी और जेएलआर इस बार ये भारत में ऑटो एक्सपो में शामिल नहीं होंगी। देश की प्रमुख दोपहिया विनिर्माता हीरो मोटोकॉर्प, होंडा मोटरसाइकिल्स ऐंड स्कूटर्स के साथ ही कार विनिर्माताओं में होंडा कार्स इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर, फोर्ड, निसान और अशोक लीलैंड भी बार एक्सपो में शिरकत नहीं करेंगी। हीरो मोटोकॉर्प के प्रवक्ता ने कहा, 'बाजार की अगुआ होने के नाते हीरो मोटोकॉर्प हमेशा से ही एक्सपो की प्रमुख भागीदार रही है। एक्सपो में भागीदारी के लिए महीनों की तैयारी करनी होती है और काफी संसाधन लगते हैं। अपनी प्राथमिकता का ध्यान रखते हुए हमने आगामी एक्सपो में शामिल नहीं होने का निर्णय किया है।'

 

वढेरा ने कहा, 'जब आपको नुकसान हो रहा हो और उत्पादन घटाने को मजबूर होना पड़ रहा है, ऐसे में हमें आत्मविश्लेषण करना चाहिए और प्रचार और मार्केटिंग अभियानों पर हमें ज्यादा पैसे नहीं खर्च करने चाहिए।' घरेलू वाहन उद्योग की नरमी का व्यापक असर द्विवार्षिक ऑटो एक्सपो पर पड़ेगा। कंपनियां भागीदारी नहीं करने के पीछे ऊंची लागत, आयोजन स्थल के दूर होने और खराब प्रबंधन जैसे बाहरी कारणों का तर्क दे रही हैं। कुछ कंपनियों का कहना है कि इसमें मुख्य रूप से कारों और एसयूवी पर जोर रहता है जिससे बाइक, ट्रक और बस विनिर्माताओं के लिए काफी सीमित गुंजाइश रहती है।

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