रमजान माह में एक नेकी के बदले मिलता है सत्तर नेकियों का सवाब*


 *बरेली से जावेद सईद खान की रिपोर्ट* 


*रमजान माह में एक नेकी के बदले मिलता है सत्तर नेकियों का सवाब* 


मुफ्ती साजिद हसनी                                   रमजान में जन्नत के दरवाजें खोल दिये जातें है- मुस्लिम धर्म गुरू मशहूर स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने कहाकि रमजान माह में जन्नत के दरवजे खोल दियें जातें है। इस्लामिक स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने कहा कि चिलचिलाती धूप व उमस भरी गर्मी में रोजादारों को प्यास की सिद्दत महसूस होगी पर इसके बाद भी मजहब-ए-इस्लाम के माननें वालें इन चीजों से दूर रहकर भी अपनें रोजे पूरें करेगें उन्होने बताया कि यदि रोजदार पांचो वक्त की नमाजें फजर जोहर, असर, मगरिब, इशा और कुरान की तिलाबत करें और अपनें रोजे का पूरा दिन अल्लाह और उसके रसूल अलैहिससलाम के जिक्र (याद) में गुजारेगें तो उन्हें भूख व प्यास का अहसास भी नहीं होगा। रमजान के महीनें में एक नेकी करनें के बदलें सत्तर नेकियों का सबाब मिलता है। उन्होने कहाकि रोजा रखना फर्ज है अगर कोई रोजा न रख सकें तो एक रोजे के बदलें लगातार 60 रोजे रखना होगे, यदि उस व्यक्ति मे 60 रोजे रखनें की ताकत नहीं तो वह 60 दिन गरीब फकीर को भर पेट दोनों समय खाना खिलायें। जो लोग जान-बूझकर रोजा नहीं रखतें है। तो वह लोग सख्त गुनहागार होगें और उनका मुस्लिम समाज से बायकाट किया जायेगा । यह विचार रखतें हुए मुफ्ती साजिद हसनी भावुक हो गयें, उन्होने बताया कि रमजान में जन्नत के दरवाजें खोल दियें जातें है और नर्ख (जहान्नम) के दरवाजें बन्द कर दियें जातें है और शैतानों की भी पूरें माह कैद कर दिया जाता है।  मुफ्ती साहब ने बताया कि कलमा, नमाज रोजा, हज, जकात पर मुस्लमानों को अमल करना चाहिए। रमजान माह में खुल्लम-खुल्ला खानें वालों को परहेज करना चाहिए। मुफ्ती साजिद हसनी ने बताया कि रोजे की हालत में इंजेक्शन लगवाना सुर्मा लगाना, सर में तेल डालनें से रोजा नहीं टूटता बल्की टयूथपेस्ट और मंजन के बारीक हिस्सें हलक से उतर गयें तो रोजा टूट जायेंगा इसलिए यह चीजे रोजे की हालत में मना है। उन्होनें आला हजरत की तहरीरकर्दा किताब फताब-ए-रजवियां के हिवाले से बताया कि खैनी, तम्बाकू, गुल करने से भी रोजा टूट जाता है। उन्होेने बताया कि जो मुसलमान साहिवे निसाब है। यानी जिनकें पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी या उसके बराबर रकम हो तो उसकी उसकी ढ़ाई प्रतिशत जकात निकालना फर्ज है। इस वक्त साढ़ें वावन तोला चांदी का मूल्य लगभग 25 हजार है और अगर नही निकाली तो गुनाहगार होगा। उन्होनें मुस्लमानों से रमजान माह में अपील की है कि यतीमों गरीबों फकीरों की मदद करना चाहिए। क्यों इस माह में एक नेकी के बदलें 70 नेकियों का सबाब मिलता है। मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने मुसलमानों से अपील की है कि कोविड 19 का पूरी तरह से पालन करें आखीर में मुफ्ती साजिद हसनी ने करोना वायरस के खात्मे के लिए मुल्क में अमनों-अमान की दुआ मांगी।

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