जमीअत उलमा ए हिंद दिल्ली प्रदेश ने किसान आंदोलन को दिया समर्थन

 मौलाना आबिद कासमी

  उत्तर पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में मदरसा फलां ए दारेन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमीअत उलमा हिंद के दिल्ली प्रदेश के सदर मौलाना आबिद कासमी ने किसान आंदोलन को जमीअत उलमा ए हिंद की ओर से समर्थन का ऐलान किया।  उन्होंने कहा कि जमीअत उलमा ए हिंद किसानों के साथ हर तरीके से साथ हैं। किसानों की जायज मांग है और सरकार को किसानों की मांगों को मान लेना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह तीनों किसान बिलो को रद्द करें और एमएसपी के लिए संसद में कानून बनाए। आज इतनी ठंड के बीच किसान दिल्ली में सड़कों पर पड़ा हुआ है और सरकार इस कदर संवेदनहीन हो गई है कि उसे कारपोरेट के फायदे के अलावा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। सरकार और किसानों के बीच अविश्वास इस कदर बढ़ गया है सरकार के लोग किसानों को माओवादी ,नक्सलवादी और खालिस्तानी तक कह रहे हैं जबकि किसान अन्नदाता है और तरह-तरह के परेशानियों से गुजर कर वह देश को पालने का काम करता है। लॉकडाउन के दौरान जब जीडीपी चारों तरफ से गिर रही थी उस वक्त देश की जीडीपी को किसान और खेती ने ही  संभाला है। सरकार को तुरंत किसानों की बात मान लेनी चाहिए। जब किसान आंदोलन के दिल्ली के दिल्ली आ रहे थे तो सरकार ने सड़के खुदवादी,आंसू गैस के गोले छोड़े और किसानों पर अत्याचार किया। पानी की बौछारें की। आज किसान सड़कों पर बैठा हुआ है ।22 किसानों की शहादत इस आंदोलन में अब तक हो चुकी है। और सरकार टस से मस नहीं हो रही है। सरकार का यह रवैया ठीक नहीं है। सरकार को किसानों की बात मान लेनी चाहिए और इस कानून को रद्द कर देना चाहिए । जगह-जगह से खबरें आ रही है कि किसान अपनी फसलें जोत रहे हैं, गोभी की फसल का बीज का दाम भी नहीं मिल रहा है, और किसानों को फसल जोतनी पड़ रही है। हालात तो यह हो गए हैं कि देश का मीडिया, गोदी मीडिया अपना विश्वास खो चुका है । आज किसानों को अपना अखबार "ट्रॉली टाइम्स" निकालना पड़ा है, यह मामूली घटना नहीं है यह एक ऐतिहासिक घटना है। जमीअत उलमा ए हिंद के प्रदेश सदर ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट शांतिपूर्वक आंदोलन करने की बात कह चुका है । सरकार बात करने के लिए तो कहती है लेकिन सरकार का जो रवैया है वह अहंकारी है । और अहंकार से कभी सरकारे नहीं चलती है। कारपोरेट घराने पहले भी हुआ करते थे लेकिन जिस तरह का रुख इस सरकार में कारपोरेट घराने के लिए बनाया जा रहा है वह नाकाबिले बर्दाश्त है। कारपोरेट घरानों ने अपने गोदाम बना लिए हैं और देश के किसानों की जमीन छीनने की तरफ बढ़ रहे हैं। किसान किसी भी हालत में यह ज़़ुल्म नहीं होने देगा। जमीअत उलमा ए हिंद किसानों के साथ है और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनकी हर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। 1919 में जमीअत उलमा ए हिंद की बुनियाद रखी गई थी और 100 साल से अधिक होने के बाद भी इस संगठन ने अपनी जिम्मेदारियों को समझा है। और लगातार जब भी मुल्क और मुल्क के निवासियों पर कोई आफत आई है तो जमीअत उलमा ए हिंद आगे बढ़ कर उनका साथ देने के लिए आई है ।उन्होंने कहा कि जमीअत उलमा ए हिंद का सदस्यता अभियान जो कोरोना के टाइम रोक दिया गया था, जमीयत के पदाधिकारी अब सदस्यता अभियान को पूरा करें। और 31 दिसंबर 2020 तक सभी पदाधिकारी अपनी अपनी सदस्यता रशीद दफ्तर में जमा करा दें।

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